चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(Played on borrowed money—now a ₹3 crore prize!) चंडीगढ़ की बापूधाम कॉलोनी से निकलकर भारतीय महिला क्रिकेट टीम तक पहुंचीं नंदिनी शर्मा ने एशियाई खेलों में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतकर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उनकी इस सफलता के पीछे वर्षों की कड़ी मेहनत, परिवार का संघर्ष और कभी हार न मानने का जज्बा रहा।
शनिवार को सेक्टर-16 क्रिकेट ग्राउंड में चंडीगढ़ क्रिकेट एसोसिएशन की ओर से नंदिनी को एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने पर सम्मानित किया गया। इस दौरान चंडीगढ़ क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष सारांश टंडन, पूर्व अध्यक्ष संजय टंडन और डायरेक्टर स्पोर्ट्स सौरव अरोड़ा समेत कई पदाधिकारी मौजूद रहे।
गोल्ड के बाद नंदिनी को ₹3 करोड़ का इनाम
चंडीगढ़ प्रशासन के डायरेक्टर स्पोर्ट्स सौरव अरोड़ा ने बताया कि 2023 की नई खेल नीति के तहत नंदिनी शर्मा को ₹3 करोड़ का नकद पुरस्कार दिया जाएगा।
सम्मान समारोह में नंदिनी ने अपनी क्रिकेट यात्रा और संघर्ष के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि गोल्ड मेडल के बाद चंडीगढ़ में मिला सम्मान उनके लिए बेहद भावुक पल है। उनके मुताबिक, इस एक मेडल के पीछे कई वर्षों की मेहनत, परिवार का सहयोग, कोचिंग और लगातार संघर्ष छिपा है।
क्रिकेट के लिए परिवार ने लिया लोन
नंदिनी ने बताया कि वह एक सामान्य परिवार से आती हैं और क्रिकेट का सफर आसान नहीं था। आर्थिक परेशानियां कई बार सामने आईं और क्रिकेट से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने के लिए परिवार को लोन तक लेना पड़ा।
लेकिन पिता और भाइयों ने कभी उनका हौसला टूटने नहीं दिया। परिवार ने हमेशा उन्हें खेल जारी रखने, मेहनत करने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
मुश्किलें आईं, लेकिन क्रिकेट नहीं छोड़ा
नंदिनी के लिए आर्थिक संकट कभी क्रिकेट छोड़ने की वजह नहीं बना। उन्होंने सुबह से शाम तक अभ्यास किया और लगातार अपने खेल को बेहतर करने पर ध्यान दिया।
करीब 10-12 साल पहले चंडीगढ़ में क्रिकेट शुरू करने वाली नंदिनी ने सेक्टर-26 स्थित गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल के क्रिकेट ग्राउंड पर जमकर अभ्यास किया। चंडीगढ़ क्रिकेट एसोसिएशन के अलग-अलग आयु वर्गों में खेलते हुए उन्होंने धीरे-धीरे भारतीय टीम तक का सफर तय किया।
फास्ट बॉलर की रफ्तार पर फोकस
फास्ट बॉलर के तौर पर नंदिनी का फोकस गति, लाइन-लेंथ और फिटनेस पर है। उनका कहना है कि क्रिकेट में हर दिन कुछ नया सीखना जरूरी है और लंबे समय तक महिला क्रिकेट में बने रहने के लिए फिटनेस बेहद अहम है।
उन्होंने चंडीगढ़ की लड़कियों को संदेश देते हुए कहा कि खेल के क्षेत्र में अवसर लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन सिर्फ मौका मिलना काफी नहीं है। लगातार मेहनत और बेहतर प्रदर्शन ही आगे बढ़ने की कुंजी है।
अब भारतीय वनडे टीम में जगह पक्की करने का लक्ष्य
एशियाई खेलों में गोल्ड जीतने के बाद भी नंदिनी की नजर अगले लक्ष्य पर है। उनका कहना है कि फिलहाल पूरा फोकस क्रिकेट पर है और वह भारतीय महिला वनडे टीम में खुद को मजबूती से स्थापित करना चाहती हैं।
ओलंपिक को लेकर फिलहाल वह ज्यादा नहीं सोच रहीं। उनका लक्ष्य है कि जब भी मैदान पर उतरने का मौका मिले, वह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें।
बापूधाम से एशियन गेम्स तक…
नंदिनी की कहानी सिर्फ एक गोल्ड मेडल की कहानी नहीं है। आर्थिक मुश्किलों के बीच परिवार का साथ, वर्षों की मेहनत और क्रिकेट के प्रति जुनून ने बापूधाम कॉलोनी की बेटी को भारतीय टीम तक पहुंचाया। अब ₹3 करोड़ के पुरस्कार के साथ नंदिनी की यह उपलब्धि चंडीगढ़ की दूसरी बेटियों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।



















