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पार्वती-II परियोजना पर क्यों उठे सवाल? पानी छोड़े जाने के बाद जांच शुरू

कुल्लू/शिमला । राजवीर दीक्षित

(Why are questions being raised about the Parvati-II project? An investigation has begun after the water release) कुल्लू जिले में शनिवार रात पार्वती हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट-II से अचानक पानी छोड़े जाने की घटना को ऊर्जा निदेशालय ने गंभीरता से लिया है। मामले की जांच के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट से विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है। साथ ही विभागीय अधिकारियों की एक टीम मौके पर भेजकर स्थिति का निरीक्षण करवाया जा रहा है।
ऊर्जा निदेशालय के निदेशक शुभ करण सिंह ने कहा कि जांच रिपोर्ट और मौके के निरीक्षण के आधार पर सरकार को उचित कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी।
अब सवाल यह है कि आखिर पानी अचानक क्यों छोड़ा गया और क्या इससे पहले लोगों को पर्याप्त जानकारी या चेतावनी दी गई थी?
NHPC प्रोजेक्ट में पानी के रिसाव की ताजा घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बीच प्रोजेक्ट की निगरानी और रखरखाव व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अब जरूरत है कि संबंधित अधिकारी मामले की गंभीरता से जांच करें और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाएं।

HRT में फिर रिसाव, नीचे बसे गांवों में दहशत!

32 किलोमीटर लंबी हेड रेस टनल से अचानक भारी मात्रा में मलबा और कचरा बहने लगा। देखते ही देखते नीचे बसे रिहायशी इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई।बड़ा हादसा तो टल गया, लेकिन इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब ऐसी घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं, तो आखिर स्थायी समाधान क्यों नहीं किया गया?
अब लोगों की नजर इस बात पर है कि संबंधित विभाग इस घटना के बाद क्या कदम उठाता है और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस व्यवस्था की जाती है।

लीकेज के सवाल पर पारबती-II GM बोले—मेंटेनेंस में कमजोर हिस्सों पर लगातार काम जारी

पारबती-II प्रोजेक्ट में बार-बार लीकेज को लेकर उठ रहे सवालों पर GM रंजीत सिंह ने कहा कि प्रोजेक्ट की डिजाइन और निर्माण के समय आवश्यक सावधानियां बरती गई थीं। उन्होंने माना कि संचालन शुरू होने के बाद कुछ समस्याएं सामने आ सकती हैं। सिंह के मुताबिक, वार्षिक मेंटेनेंस के दौरान कमजोर हिस्सों को मजबूत करने के साथ-साथ सामने आने वाली तकनीकी दिक्कतों को भी प्राथमिकता के आधार पर ठीक किया गया।

तकनीकी खराबी बनी शनिवार रात की घटना की वजह! कई पुर्जे एक साथ हुए फेल

शनिवार रात जब जेनरेटिंग यूनिट्स पूरी क्षमता पर चल रही थीं, उसी दौरान सिस्टम में एक के बाद एक तकनीकी खराबियां सामने आईं। ADIT का वैक्यूम-ब्रेकिंग वॉल्व खराब होने के बाद पानी अंदर प्रवेश कर गया। पानी ने अपना रास्ता बदला और डंपिंग साइट के बीच से बहने लगा। तेज बहाव के साथ मलबा भी बह गया। अधिकारियों के मुताबिक कई पुर्जों का एक साथ खराब होना इस पूरी घटना में अहम वजह माना जा रहा है।

हाइड्रो प्रोजेक्ट क्षेत्र में बार-बार पानी का रिसाव, ग्रामीणों की सुरक्षा चिंता बढ़ी

पार्वती हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट-II के आसपास पिछले कुछ वर्षों में पानी के रिसाव की कई घटनाएं सामने आई हैं। अगस्त 2026 में पावरहाउस के समीप पहाड़ी से भारी मात्रा में पानी का रिसाव देखा गया, जिसके बाद पांच आसपास के गांवों में चिंता का माहौल बन गया। नवंबर 2023 में सियुंड स्थित पावरहाउस की ड्रेनेज गैलरी से पानी का तेज बहाव सामने आया था। इससे पहले 2022 में भाईवाल गांव में पावरहाउस के करीब पानी के रिसाव से कई घरों को नुकसान पहुंचने की सूचना थी। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने परियोजना क्षेत्र की सुरक्षा, निगरानी और जल निकासी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
दावा सुरक्षा का, लेकिन सवाल लीकेज का! GM का कहना है कि HRT के पास बसे गांवों को कोई खतरा नहीं है। वहीं, बार-बार लीकेज देखने वाले ग्रामीण इस दावे से पूरी तरह निश्चिंत नहीं हैं। लोगों की मांग है कि सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि सुरक्षा के ठोस इंतजाम और लीकेज की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए।
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