Home Himachal Pradesh हिमाचल में अब 5 लाख तक के टेंडर होंगे ऑफलाइन! आपदा प्रभावित...

हिमाचल में अब 5 लाख तक के टेंडर होंगे ऑफलाइन! आपदा प्रभावित इलाकों को बड़ी राहत

शिमला । राजवीर दीक्षित

(Tenders up to ₹5 lakh in Himachal to be offline now! Major relief for disaster-hit areas) हिमाचल प्रदेश में जिला उपायुक्तों की रिपोर्ट के आधार पर एसडीआरएफ/एनडीआरएफ के तहत स्वीकृत 5 लाख रुपये तक के रिस्टोरेशन कार्यों के लिए अब दोबारा सचिवालय से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी। नई व्यवस्था के तहत 5 लाख रुपये तक के टेंडर अधिशासी अभियंता स्तर पर ही ऑफलाइन माध्यम से स्वीकृत किए जा सकेंगे। इससे आपदा प्रभावित क्षेत्रों में लंबे समय से रुके सड़क निर्माण, मरम्मत और अन्य विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है। मंजूरी की प्रक्रिया आसान होने से स्थानीय स्तर पर काम जल्द शुरू हो सकेंगे और प्रभावित इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की बहाली में तेजी आएगी।

टूटी सड़कें इंतजार करती रहीं, टेंडर प्रक्रिया ने बढ़ाई मुश्किल

आपदा से तबाह पहाड़ी इलाकों में सड़क, डंगे और पुल बहने के बाद लोगों को जल्द राहत की जरूरत थी, लेकिन टेंडर प्रक्रिया बड़ी बाधा बन गई।
कमजोर नेटवर्क के कारण ठेकेदार ऑनलाइन टेंडर जमा नहीं कर पा रहे थे। कई मामलों में पर्याप्त बोली नहीं आई, जबकि कुछ में नो-बिड की स्थिति बन गई। ऐसे में विभागों को री-टेंडर करना पड़ा और बहाली के काम आगे नहीं बढ़ सके। चंबा से शिमला तक कई इलाकों में इसका असर देखने को मिला। सैकड़ों रिस्टोरेशन वर्क टेंडर प्रक्रिया में फंसे रहे।

5 लाख तक के कामों के लिए ऑफलाइन टेंडर की मंजूरी

राज्य सरकार ने 5 लाख रुपये तक की लागत वाले विकास कार्यों के लिए ऑफलाइन टेंडर की अनुमति दे दी है। इस फैसले से लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को छोटे कार्यों के लिए सीधे टेंडर प्रक्रिया शुरू करने का अधिकार मिल गया है। इससे टेंडर में लगने वाला समय कम होगा और विकास कार्यों को जल्द शुरू किया जा सकेगा। सरकार के इस फैसले से छोटे प्रोजेक्ट्स में तेजी आने की उम्मीद है।

छोटे कामों को मिलेगी रफ्तार, 2-3 दिन में वर्क अवार्ड

ऑफलाइन प्रक्रिया के तहत अब छोटे निर्माण कार्यों का नोटिस, कोटेशन और वर्क अवार्ड महज 2 से 3 दिनों में पूरा किया जा सकेगा। मानसून की भारी बारिश से क्षतिग्रस्त हुई सड़कों की रिटेनिंग वॉल, कलवर्ट और अन्य छोटे कार्यों को जल्द शुरू करवाने में मदद मिलेगी। इससे कागजी प्रक्रिया में लगने वाला समय घटेगा और मौके पर काम तेजी से शुरू हो सकेगा।

गांव के ठेकेदारों के लिए बड़ी राहत

छोटे गांवों में काम करने वाले लोकल ठेकेदारों के लिए यह फैसला राहत लेकर आया है। जिन ठेकेदारों के पास डिजिटल सिग्नेचर या लैपटॉप जैसी सुविधाएं नहीं हैं, वे अब सीधे लोक निर्माण विभाग के डिवीजन में जाकर आवेदन कर सकेंगे।
खास बात यह है कि यह छूट फिलहाल आपदा प्रभावित क्षेत्रों में 2025-26 मानसून आपदा से जुड़े रिस्टोरेशन कार्यों के लिए लागू की गई है। इसका मकसद सड़क संपर्क जल्द बहाल करना और जरूरी विकास कार्यों को सर्दी शुरू होने से पहले पूरा करना है।

ऑनलाइन टेंडर में लगते थे 15-21 दिन, अब प्रक्रिया में आएगी तेजी

लोक निर्माण विभाग में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली लागू है। इसके तहत 1 लाख रुपये से अधिक लागत वाले सभी कार्यों के लिए ऑनलाइन टेंडर अनिवार्य था। टेंडर जारी होने से लेकर बिड सबमिशन और टेक्निकल ओपनिंग तक पूरी प्रक्रिया में करीब 15 से 21 दिन लग जाते थे।
इस लंबी प्रक्रिया के कारण कई छोटे विकास कार्यों की शुरुआत में भी देरी होती थी।

आपदा में नहीं रुकेगा काम! 5 लाख तक ऑफलाइन टेंडर को मंजूरी

बारिश, बाढ़ या अन्य आपदा में सड़कें क्षतिग्रस्त होने के बाद उनकी मरम्मत में टेंडर प्रक्रिया की औपचारिकताएं कई बार समय लेती हैं। इसी को देखते हुए 5 लाख रुपये तक के कार्यों के लिए ऑफलाइन टेंडर की छूट दी गई है।
अब जरूरत पड़ने पर छोटे काम तेजी से शुरू किए जा सकेंगे।
हालांकि पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं होगा। ऑफलाइन टेंडर का पूरा रिकॉर्ड और तुलनात्मक विवरण ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य रहेगा। 5 लाख रुपये से ज्यादा के कार्य ऑनलाइन टेंडर से ही होंगे।

Translate »
error: Content is protected !!