ऊना। राजवीर दीक्षित
(Cement prices rise, burden on the public: Pankaj Sahore) हिमाचल प्रदेश में सीमेंट की कीमत में बढ़ोतरी को लेकर पूर्व जिला परिषद सदस्य पंकज सहोड़ ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश से निकलने वाले प्राकृतिक संसाधनों के बावजूद हिमाचल के लोगों को ही महंगे दामों पर निर्माण सामग्री खरीदनी पड़ रही है।
सहोड़ ने कहा कि सीमेंट के दाम में प्रति बैग 10 रुपये की बढ़ोतरी का सीधा असर आम परिवारों, छोटे निर्माणकर्ताओं और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों पर पड़ता है। 100 बैग खरीदने पर करीब 1,000 रुपये और 500 बैग पर करीब 5,000 रुपये अतिरिक्त खर्च हो सकता है। बड़े निर्माण कार्यों में यह आर्थिक बोझ और बढ़ जाता है।
महंगाई के बीच बढ़ रही निर्माण लागत
पंकज सहोड़ ने कहा कि पहले ही महंगाई के कारण आम आदमी के लिए अपना घर बनाना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। ऐसे में सीमेंट की कीमतों में बार-बार बढ़ोतरी से निर्माण लागत और बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार को सीमेंट कंपनियों की ओर से की जा रही कीमत वृद्धि की समीक्षा करवानी चाहिए और कंपनियों से दाम बढ़ाने के आधार तथा लागत संरचना का स्पष्ट विवरण लेना चाहिए।
मूल्य निर्धारण की हो समीक्षा
सहोड़ ने कहा कि यदि कहीं अनुचित मूल्य निर्धारण या प्रतिस्पर्धा-विरोधी गतिविधि की आशंका हो तो मामला संबंधित सक्षम प्राधिकरण के समक्ष उठाया जाना चाहिए। सरकार को अपने अधिकार क्षेत्र में कर और अन्य नीतिगत पहलुओं की भी समीक्षा करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं के हित में पारदर्शी और उचित मूल्य व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।
‘प्राकृतिक संसाधन प्रदेश के, बोझ भी जनता पर क्यों?’
सहोड़ ने सवाल उठाया कि जब पत्थर और अन्य प्राकृतिक संसाधन हिमाचल से मिल रहे हैं, तो प्रदेश के लोगों को निर्माण सामग्री के लिए लगातार अधिक कीमत क्यों चुकानी पड़े।
उन्होंने कहा कि विकास का लाभ आम जनता तक पहुंचना चाहिए और बढ़ती निर्माण लागत का अतिरिक्त बोझ भी जनता पर नहीं पड़ना चाहिए।



















