Home Himachal Pradesh देशभर में 221 दवाएं फेल! हिमाचल की 63, उत्तराखंड की 39 दवाओं...

देशभर में 221 दवाएं फेल! हिमाचल की 63, उत्तराखंड की 39 दवाओं पर सवाल

सोलन । राजवीर दीक्षित

(221 medicines fail tests nationwide! Questions raised over 63 drugs from Himachal and 39 from Uttarakhand) केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की अगस्त ड्रग अलर्ट रिपोर्ट ने दवा निर्माण क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। देशभर में जांचे गए दवाओं और कॉस्मेटिक के 221 सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें 191 सैंपल राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं और 29 सैंपल केंद्रीय प्रयोगशालाओं की जांच में फेल पाए गए।
सबसे ज्यादा चिंता हिमाचल प्रदेश को लेकर सामने आई है। राज्य के बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, झाड़माजरी, भुड्ड, गुल्लरवाला, कालाअंब, पांवटा साहिब, परवाणू, सोलन और कांगड़ा की दवा निर्माण इकाइयों से जुड़े 63 सैंपल फेल मिले हैं।
इसके अलावा उत्तराखंड के 39, गुजरात के 17, महाराष्ट्र के 16 और मध्य प्रदेश के 12 सैंपल फेल पाए गए। तमिलनाडु और हरियाणा के 11-11, सिक्किम और उत्तर प्रदेश के 9-9 तथा पंजाब के 8 सैंपल जांच में फेल हुए हैं।

दवाओं की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल! एंटीबायोटिक से लेकर बच्चों के सीरप तक फेल

जांच में कई दवाओं के सैंपल गुणवत्ता के निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतर पाए। इनमें एंटीबायोटिक, हृदय रोग, दर्द-बुखार, बच्चों के सीरप, किडनी, खांसी, पेट, आंखों की दवाओं के साथ इंजेक्शन और विटामिन उत्पाद शामिल हैं।
जांच के दौरान कई सैंपल डिसाल्यूशन, कंटेंट, एस्से, स्टेरिलिटी, पीएच, पार्टिकुलेट मैटर और सक्रिय औषधीय तत्व (API) की निर्धारित मात्रा जैसे महत्वपूर्ण मानकों में फेल पाए गए।
मामला सामने आने के बाद दवा कंपनियों पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। राज्य औषधि नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर के अनुसार, संबंधित कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। साथ ही फेल पाए गए बैच की बिक्री और वितरण पर रोक लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
कंपनियों से जवाब मांगा गया है और जांच पूरी होने के बाद औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, अधिकतर दवा उद्योगों ने गुणवत्ता जांच में फेल सैंपलों को चुनौती दी है।

3 कंपनियों की दवाएं जांच में फेल

दवा उद्योग से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। जांच के दौरान अलग-अलग बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली तीन दवाओं के सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें किडनी की पथरी, टाइप-2 डायबिटीज और सर्दी-जुकाम व सूखी खांसी में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं।

लखनऊ की स्टेडमैड प्राइवेट लिमिटेड में बनी डाइसोडियम हाइड्रोजन साइट्रेट साल्यूशन का सैंपल फेल पाया गया है। यह दवा किडनी की पथरी के इलाज में इस्तेमाल की जाती है।

वहीं, सिरमौर जिले की सिंबायसिज फार्मास्यूटिकल्स में बनी सिटाग्रिप्टिन और मेटफार्मिन टैबलेट्स भी जांच में फेल पाई गई हैं। यह दवा ब्लड शुगर कंट्रोल और टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों के लिए इस्तेमाल होती है। संबंधित बैच नंबर TG242142 है और इसकी एक्सपायरी नवंबर 2026 बताई गई है।

इसके अलावा उत्तराखंड की HSN बायोटेक में बनी डेक्सट्रोमेथोर्फन हाइड्रोब्रोमाइड और क्लोरफेनिरामाइन मैलिएट कफ सिरप का सैंपल भी फेल पाया गया। इसका बैच नंबर CPL 60022 और एक्सपायरी दिसंबर 2027 है।

ओक्सिटोसिन से एंटीबायोटिक तक फेल! 3 दवाओं पर उठे सवाल

दवाओं की गुणवत्ता को लेकर सामने आई जांच रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। ओक्सिटोसिन इंजेक्शन समेत तीन अलग-अलग दवाओं के सैंपल फेल पाए गए हैं।
फेल सैंपलों में प्रसव के दौरान इस्तेमाल होने वाला ओक्सिटोसिन, दर्द कम करने वाली ट्रामाडोल-पैरासिटामोल टैबलेट और बैक्टीरियल संक्रमण के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एजिथ्रोमाइसिन-लैक्टिक एसिड बैसिलस टैबलेट शामिल हैं।
ओक्सिटोसिन का बैच नंबर 91707, ट्रामाडोल-पैरासिटामोल का MT-1231 और एजिथ्रोमाइसिन-लैक्टिक एसिड बैसिलस का GT 30389J बताया गया है।
मामला सामने आने के बाद संबंधित दवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता पर निगरानी बढ़ाने की जरूरत को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

पैरासिटामोल समेत 2 दवाओं के सैंपल फेल, स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप

बच्चों में बुखार और दर्द कम करने के लिए इस्तेमाल होने वाली पैरासिटामोल पीडियाट्रिक ओरल सस्पेंशन का सैंपल जांच में फेल पाया गया है। यह दवा बद्दी के भुड्ड स्थित स्ट्रासवैल ऑर्गेनिक्स में तैयार की गई थी। इसका बैच नंबर SOLOT-027 और एक्सपायरी सितंबर 2026 है।

इसके अलावा पंजाब में बने कोजिक एसिड डिपालमिटेट, विटामिन-E और ग्लिसरीन वाले स्किन केयर साबुन का सैंपल भी मानकों पर खरा नहीं उतरा। यह उत्पाद डीआर स्किन केयर में तैयार हुआ था। इसका बैच नंबर HS-1787 और एक्सपायरी नवंबर 2026 है।

दो अलग-अलग उत्पादों के सैंपल फेल होने से दवा और कॉस्मेटिक उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। संबंधित बैचों की गुणवत्ता और बाजार में उनकी उपलब्धता पर भी नजर रखी जा सकती है।

Translate »
error: Content is protected !!