नई दिल्ली। राजवीर दीक्षित
(Arrest without stating the reason proves costly! Supreme Court rules: Arrest unconstitutional if rules are violated) सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी को लेकर एक अहम संवैधानिक सुरक्षा को फिर स्पष्ट किया है। कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करते समय उसे गिरफ्तारी के आधार और कारण लिखित रूप में ऐसी भाषा में उपलब्ध कराना जरूरी है, जिसे वह समझ सके। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, अनुच्छेद 22(1) के तहत यह व्यक्ति का मौलिक अधिकार है और इसका पालन न होने पर गिरफ्तारी और उसके बाद की रिमांड की वैधता प्रभावित हो सकती है।
रिहाई के बाद पुलिस सीधे दोबारा गिरफ्तार नहीं कर सकेगी
कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति को अनुच्छेद 22(1) के उल्लंघन के कारण रिहा किया जाता है और जांच एजेंसी को उसकी हिरासत दोबारा जरूरी लगती है, तो एजेंसी को मजिस्ट्रेट के सामने आवेदन करना होगा।
इस आवेदन में दोबारा गिरफ्तारी की जरूरत और वजह बतानी होगी। साथ ही यह भी स्पष्ट करना होगा कि पहली गिरफ्तारी के समय गिरफ्तारी के कारण क्यों नहीं बताए गए थे।
पहली गिरफ्तारी में गलती करने वाला अधिकारी नहीं लेगा दोबारा गिरफ्तारी का फैसला
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि जिस अधिकारी ने पहली गिरफ्तारी के दौरान संवैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया, उसे दोबारा गिरफ्तारी का निर्णय लेने की जिम्मेदारी नहीं दी जानी चाहिए। आगे की जांच किसी दूसरे अधिकारी को सौंपने और पहली गिरफ्तारी में हुई चूक की विभागीय जांच के निर्देश भी दिए गए हैं।
चार्जशीट दाखिल करने से पुरानी गलती खत्म नहीं होगी
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बाद में चार्जशीट दाखिल हो जाने या अदालत द्वारा मामले का संज्ञान ले लेने से गिरफ्तारी के समय हुई संवैधानिक गलती अपने आप ठीक नहीं हो जाती। सुप्रीम कोर्ट पहले भी कह चुका है कि बाद की चार्जशीट गैरकानूनी गिरफ्तारी को वैध नहीं बना सकती।
गिरफ्तारी की वजह लिखित और समझ आने वाली भाषा में देना जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि केवल मौखिक रूप से गिरफ्तारी का कारण बता देना पर्याप्त नहीं है। गिरफ्तारी के आधार को लिखित रूप में उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि गिरफ्तार व्यक्ति अपने खिलाफ कार्रवाई के आधार को समझ सके और उचित कानूनी उपाय अपना सके।
पुलिस पर अनुपालन साबित करने की जिम्मेदारी
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि गिरफ्तार व्यक्ति यह दावा करता है कि उसे गिरफ्तारी के कारण नहीं बताए गए, तो संवैधानिक प्रावधान का पालन हुआ था, यह साबित करने की जिम्मेदारी पुलिस पर होगी। कोर्ट ने कहा कि पुलिस के रिकॉर्ड में गिरफ्तारी के वास्तविक आधार का समकालीन रिकॉर्ड होना चाहिए।
क्या है अनुच्छेद 22(1)?
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 22(1) गिरफ्तार व्यक्ति को यह सुरक्षा देता है कि उसे उसकी गिरफ्तारी के आधार की जानकारी दी जाए और उसे अपनी पसंद के कानूनी प्रतिनिधि से सलाह लेने तथा बचाव का अधिकार मिले। सुप्रीम कोर्ट ने इस सुरक्षा को गिरफ्तार व्यक्ति के मौलिक अधिकार से जोड़ा है।
यानी अब गिरफ्तारी की प्रक्रिया में सिर्फ गिरफ्तारी करना ही पर्याप्त नहीं होगा—पुलिस को संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए गिरफ्तार व्यक्ति को उसके खिलाफ कार्रवाई के आधार की स्पष्ट और लिखित जानकारी भी देनी होगी।

















