शिमला । राजवीर दीक्षित
(Major impact on Himachal’s transport system; HRTC suspends 282 routes)हिमाचल के गांवों में सार्वजनिक परिवहन का संकट गहराता जा रहा है। HRTC के घाटे को कम करने के लिए बीते तीन वर्षों में 282 बस रूट बंद किए गए, जिनमें से 196 रूट ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों के थे।
इन इलाकों में निजी वाहन हर परिवार की पहुंच में नहीं हैं और कई जगहों पर HRTC की बस ही आने-जाने का सबसे भरोसेमंद साधन है। ऐसे में रूट बंद होने का सीधा असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ा है। बच्चों को स्कूल-कॉलेज पहुंचने, मरीजों को अस्पताल जाने और ग्रामीणों को बाजार या सरकारी दफ्तरों तक पहुंचने में परेशानी हो रही है।
विडंबना यह है कि इतनी बड़ी संख्या में रूट बंद करने के बाद भी निगम घाटे से बाहर नहीं निकल पाया। वहीं 15 अन्य रूटों पर सेवाओं में कटौती ने समस्या को और गंभीर कर दिया है।
बस रूट बंद करने के पीछे घाटे की मजबूरी, HRTC का नुकसान 2272 करोड़
HRTC लगातार बढ़ते वित्तीय घाटे से जूझ रहा है। 31 मार्च 2025 तक निगम का संचित घाटा 2272.24 करोड़ रुपये हो गया। सरकार के अनुसार, जिन रूटों पर यात्रियों की संख्या कम है और संचालन से पर्याप्त आय नहीं हो रही, उन्हें युक्तिसंगत बनाया जा रहा है। मगर सवाल यह है कि आर्थिक नुकसान कम करने की इस कवायद में ग्रामीण और दूरदराज के यात्रियों की परिवहन जरूरतों को कैसे पूरा किया जाएगा?
HRTC का घाटा 3 साल में 565 करोड़ पार, 2022-23 में सबसे ज्यादा नुकसान
2022-23 से 2024-25 के बीच हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) को लगातार भारी घाटे का सामना करना पड़ा। वर्ष 2022-23 में निगम को 259.02 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ। इसके बाद 2023-24 में घाटा घटकर 152.89 करोड़ रुपये रहा, जबकि 2024-25 में यह फिर थोड़ा बढ़कर 153.21 करोड़ रुपये पहुंच गया।
तीन वर्षों में HRTC का कुल शुद्ध घाटा 565 करोड़ रुपये से अधिक रहा। वहीं, वित्तीय वर्ष 2025-26 की बैलेंस शीट अभी तैयार की जा रही है, इसलिए इस अवधि के घाटे की अंतिम तस्वीर सामने आना बाकी है।
घाटे वाले HRTC रूटों का बदलेगा मॉडल, निजी बसों को मिलेगा मौका
HRTC के लिए घाटे का कारण बने कई बस रूटों के संचालन का तरीका अब बदलने जा रहा है। निगम द्वारा बंद किए गए कई रूट निजी बस ऑपरेटरों को सौंपे जाएंगे।
सरकार ने निजी ऑपरेटरों को प्रोत्साहित करने के लिए बस खरीद पर अनुदान देने की योजना शुरू की है। इसका सीधा फायदा उन यात्रियों को मिलने की उम्मीद है, जिनके क्षेत्रों में HRTC सेवा बंद हो गई है।
सरकार का मानना है कि निजी ऑपरेटरों के माध्यम से कम व्यवहार्य रूटों पर भी परिवहन सुविधा को बनाए रखा जा सकता है और HRTC के वित्तीय घाटे को नियंत्रित किया जा सकता है। साथ ही निगम 1,000 ई-बसें खरीदकर अपने मौजूदा बेड़े को आधुनिक बनाने की तैयारी में है।
घाटे से उबरने की तैयारी: HRTC में रूट से लेकर राजस्व तक होगा बड़ा बदलाव
HRTC को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए सरकार ने 13 सूत्रीय कार्ययोजना पर काम शुरू किया है। योजना में परिचालन खर्च कम करने के साथ-साथ आमदनी के नए रास्ते तलाशने की रणनीति बनाई गई है।
बस रूटों और बेड़े का युक्तीकरण, इलेक्ट्रिक बसों का विस्तार, ईंधन दक्षता और रखरखाव खर्च में कमी इसके प्रमुख बिंदु हैं। कर्मचारियों की तैनाती को भी जरूरत के मुताबिक व्यवस्थित किया जाएगा। वहीं डिपोवार प्रदर्शन की निगरानी कर जवाबदेही बढ़ाने पर जोर रहेगा। सरकार का प्रयास है कि निगम को लगातार बढ़ते घाटे से निकालकर अधिक टिकाऊ वित्तीय मॉडल की ओर ले जाया जाए।
297 ई-बसों से HRTC को कितना फायदा? आय बढ़ी या सिर्फ खर्च हुआ कम?
HRTC के बेड़े में 297 इलेक्ट्रिक बसें शामिल हो चुकी हैं और निगम को इनसे आर्थिक राहत की उम्मीद है। ई-बसों के कारण डीजल की खपत कम होने और रखरखाव खर्च में बचत की संभावना है। लेकिन बसों की खरीद के लिए लिया गया ऋण भी चुकाना है। ऐसे में निगम अब यह जानने में जुटा है कि ई-बसों ने वास्तव में कितना राजस्व जुटाया और परिचालन लागत में कितनी कमी आई।
एचआरटीसी को घाटे से बाहर निकालने के लिए सरकार की ओर से लगातार कार्य किया जा रहा है। निगम प्रदेश की लाइफलाइन के रूप में काम करता है और इसकी बसें रोजाना लाखों यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाती हैं। खासकर ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में एचआरटीसी की सेवाएं लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। सरकार का उद्देश्य निगम की सेवाओं को बनाए रखते हुए उसकी आर्थिक स्थिति को भी मजबूत करना है।



















