पालमपुर । राजवीर दीक्षित
(Parking encroaches on walkways in Palampur; High Court intervention sought) पालमपुर में दुकानों और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के बाहर पैदल चलने वालों के लिए छोड़ी गई खुली जगहों को कथित तौर पर पेड पार्किंग में तब्दील किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि दुकानदार और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के मालिक इन जगहों पर गाड़ियां खड़ी करवाकर पार्किंग शुल्क ले रहे हैं, जबकि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग यानी TCP विभाग के प्लानिंग और डेवलपमेंट नियमों के तहत इन स्थानों को पैदल राहगीरों की आवाजाही के लिए छोड़ा गया था।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि तय इस्तेमाल के बावजूद इन जगहों पर लगातार वाहन खड़े किए जा रहे हैं। जिस जगह पर लोगों को सुरक्षित पैदल चलना था, वहां अब गाड़ियों का कब्जा दिखाई दे रहा है। इसके चलते राहगीरों को सड़क पर उतरकर चलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
खासकर भीड़भाड़ वाले कमर्शियल इलाकों में यह स्थिति किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। लोगों का सवाल है कि अगर ये जगहें पैदल चलने वालों के लिए निर्धारित हैं, तो यहां पार्किंग की अनुमति आखिर किस आधार पर दी जा रही है? नियमों की अनदेखी हो रही है या फिर जिम्मेदार विभाग की निगरानी कमजोर पड़ गई है?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पैदल चलने वालों के लिए बनाई गई जगहों पर अवैध कब्जे और पार्किंग ने सड़क सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। फुटपाथ और पैदल मार्ग अब वाहनों की पार्किंग के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं, जिससे राहगीरों को मजबूरन सड़क पर चलना पड़ता है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।
लोगों का सवाल है कि जब समस्या खुलेआम नजर आ रही है, तो TCP विभाग, पालमपुर नगर निगम और पुलिस कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे? पैदल चलने वालों की जगह आखिर किसकी शह पर पार्किंग में तब्दील हो रही है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि नियमों का मकसद लोगों को सुरक्षित और व्यवस्थित रास्ता देना है, लेकिन अगर इन्हीं जगहों पर व्यावसायिक पार्किंग होने लगे तो प्लानिंग के पूरे उद्देश्य पर सवाल खड़े होते हैं।
फुटपाथ पर कब्जा, राहगीर सड़क पर और जिम्मेदार विभाग खामोश—आखिर इसका जिम्मेदार कौन?
पालमपुर में बढ़ते कमर्शियलाइज़ेशन के बीच पैदल चलने वालों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। NGO ‘पीपल्स वॉइस’ की प्रेसिडेंट नीलम, सदस्य सुभाष शर्मा और के.बी. रल्हान ने हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट से मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि पैदल यात्रियों के लिए बनाई गई जगहों पर अवैध रूप से पार्किंग का कब्जा हो गया है।
उन्होंने कोर्ट से मांग की है कि संबंधित अधिकारियों को निर्देश देकर फुटपाथ और पैदल रास्तों को खाली कराया जाए और उन्हें उनके मूल उद्देश्य के लिए बहाल किया जाए। सवाल सिर्फ पार्किंग का नहीं, बल्कि शहर की सड़कों पर आम लोगों की सुरक्षा का है।
बुजुर्ग, महिलाएं और स्कूली बच्चे तक वाहनों से भरी सड़कों पर चलने को मजबूर हैं। अगर पैदल चलने की जगह ही गाड़ियों के हवाले हो जाए, तो आखिर आम आदमी सड़क पर सुरक्षित चलेगा कहां?
स्थानीय लोगों ने अवैध पार्किंग के नाम पर वसूली करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई है। लोगों का सवाल है कि जब पैदल चलने वालों के लिए बनाई गई सार्वजनिक जगह ही कमाई का जरिया बन जाए, तो जिम्मेदार विभाग आखिर चुप क्यों हैं?
लोगों का कहना है कि सार्वजनिक रास्तों और फुटपाथ का कमर्शियल इस्तेमाल किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने सिविक और प्लानिंग अथॉरिटीज से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
वहीं, पालमपुर के SDM ओपी यादव ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है। प्रशासन यह जांच करेगा कि क्या उक्त स्थान पर पार्किंग की कानूनी अनुमति है और क्या वहां दुकानदारों को पार्किंग शुल्क वसूलने का अधिकार दिया गया है।



















